Description
एक इंसान… जिसका चेहरा खौलते तेल में जला दिया गया और उसे मरने के लिए सीलन भरे अंधेरों में फेंक दिया गया। वहाँ न खाना था, न पानी… सिर्फ दर्द, भूख और मौत का इंतज़ार। मां-बाप के दिए आदर्शों को वह भूखा रहकर भी निभाता रहा, लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने उसके भीतर की इंसानियत को तोड़ दिया? कैसे शाक-सब्ज़ी से भरे उसके निवाले बदलकर बन गए वीभत्स भूख का प्रतीक? यह उस इंसान की भयावह कहानी है… जो धीरे-धीरे बन गया आदमखोर।