Description
“जैसे हर युग में भगवान के अवतार पुनर्जन्म लेते हैं, वैसे ही दानवों के अवतार भी जन्म लेते हैं।”
श्रीलंका के संग्रहालय से रावण का रत्न चुराकर जब उसे चंगेज खान के ताबूत में स्थापित किया जाता है, तब दानव सम्राट पुनः कलियुग में जीवित हो उठता है। पृथ्वी पर विनाश फैलाने के लिए रावण बुलाता है भयानक यम सेना को, जिसकी एलियन तकनीक दुनिया के सबसे बड़े युद्ध विशेषज्ञों को भी असहाय बना देती है।
आखिरकार मानवता को सहारा लेना पड़ता है उस अमर योद्धा का, जिससे वह सबसे अधिक डरती है—प्रोफेसर अश्वत्थामा, महाभारत काल का शापित अमर। मनुष्यों की लालच से घृणा करने के बावजूद, वह इस विनाश को रोकने के लिए तैयार होता है और रचता है एक दिव्य अस्त्र—समयास्त्र। लेकिन इस अस्त्र को कोई साधारण मानव धारण नहीं कर सकता।
तब प्रोफेसर अश्वत्थामा बुलाते हैं भगवान विष्णु के छठे अवतार—भगवान परशुराम को, जो कलारीपयट्टु गुरु ‘आचार्य अद्वैत’ के रूप में गुप्त जीवन जी रहे हैं। युगों बाद परशुराम लौटते हैं रणभूमि में, यम सेना को रोकने और नरक के द्वार बंद करने के लिए। लेकिन इस बार उनका सामना होता है एक ऐसे शत्रु से, जो अनजान भी है और परिचित भी।
पौराणिक शक्तियों, अमर योद्धाओं, एलियन तकनीक और प्रलयकारी युद्ध से भरी प्रोफेसर अश्वत्थामा एक महाकाव्यात्मक संघर्ष की कहानी है, जहाँ दिव्य शक्तियाँ टकराती हैं दानवी पुनर्जन्म से।