Description
गुर्जर-प्रतिहार वंश का एक राजकुमार वैभव, विलास और ऐश्वर्य में डूबा हुआ अपने कर्तव्यों से दूर जा चुका है। लेकिन उसके अंतर्मन में आज भी गूंजती है भगवान विष्णु के प्रचंड वराह अवतार की स्मृति—वह दिव्य स्वरूप, जो उसके वंश का आदिपुरुष और रक्षक माना जाता है।
जैसे-जैसे अंधकारमय शक्तियाँ जागृत होने लगती हैं और विनाश का खतरा साम्राज्य के करीब आता जाता है, वैसे-वैसे पूरा राज्य अराजकता की गहराइयों में डूबने लगता है। वंश की मर्यादा और साम्राज्य का भविष्य अब संकट में है।
अब प्रश्न केवल इतना है—कौन उठेगा इस उत्तरदायित्व को निभाने के लिए? और क्या आने वाले इस अंधकार के बीच पुनः प्रकट होंगे वराह?
